
भुवनेश्वर। उत्कल विश्वविद्यालय परिसर में सततता (सस्टेनेबिलिटी) विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी और कार्यशाला का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) जगनेश्वर दंडपाट ने किया। “Navigating Sustainability: Innovation and Challenges in Emerging Management Practices” विषय पर यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग द्वारा आयोजित किया गया।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व सीएमडी, नाल्को डॉ. तपन चंद ने कहा कि आज का समय तीन ‘S’ से परिभाषित होता है—स्पीड, सेविंग और सस्टेनेबिलिटी। उन्होंने कहा कि सस्टेनेबिलिटी अब केवल सामाजिक-आर्थिक या पर्यावरणीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह मानव जाति के अस्तित्व से जुड़ा प्रश्न बन गया है। भारत में सतत विकास की अवधारणा नई नहीं है, क्योंकि भारतीय संस्कृति में प्रकृति और मानव के बीच संतुलित जीवन का विचार सदियों से मौजूद रहा है।
डॉ. चंद ने कहा कि उद्योगों को तकनीक के चयन से लेकर प्लांट और उपकरणों की खरीद, दैनिक संचालन, वित्तीय और व्यावसायिक प्रक्रियाओं तक हर स्तर पर सततता को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि कॉरपोरेट जगत में सस्टेनेबिलिटी को बोर्ड की नियमित चर्चा का विषय बनाया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. (डॉ.) जगनेश्वर दंडपाट ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि डिजिटलीकरण ने प्रबंधन के क्षेत्र में नई चुनौतियां पैदा की हैं। क्लाउड कंप्यूटिंग, बिग डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी अत्याधुनिक तकनीकें प्रबंधन के तरीकों में बड़ा परिवर्तन ला रही हैं। उन्होंने बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम अकादमिक जगत और उद्योगों के बीच संवाद के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम को ओपीजीसी के प्रबंध निदेशक केडा पांडु ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साइबर सुरक्षा उद्योगों के सामने एक बड़ी चुनौती के रूप में उभर रही है। वहीं, बर्धमान विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल के प्रो. (डॉ.) देबाशीष सुर ने मुख्य वक्तव्य में बताया कि ‘ट्रिपल बॉटम लाइन’ मॉडल को कंपनियां तेजी से अपनाने लगी हैं। उन्होंने अमेज़न सहित कई वैश्विक कंपनियों के उदाहरण देते हुए उनके सतत व्यावसायिक अभ्यासों पर प्रकाश डाला।
उद्घाटन सत्र के दौरान अतिथियों द्वारा एक स्मारिका का भी विमोचन किया गया। इसके बाद चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें सतत व्यवसाय मॉडल, ग्रीन स्टार्टअप, सतत कार्यबल और ग्रीन मार्केटिंग जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम का आयोजन उत्कल विश्वविद्यालय के एमकेसीजी ऑडिटोरियम में किया गया, जिसमें विभिन्न स्थानों से आए छात्र, शोधार्थी, प्राध्यापक और बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। संगोष्ठी संयोजक और विभागाध्यक्ष डॉ. रस्मिता साहू ने स्वागत भाषण दिया, जबकि संगोष्ठी के निदेशक प्रो. (डॉ.) सत्य स्वरूप देबाशीष ने कार्यक्रम की विषयवस्तु का परिचय देते हुए ब्लू इकोनॉमी और ऑरेंज इकोनॉमी जैसे सतत आर्थिक मॉडल का उल्लेख किया। कार्यक्रम के अंत में आयोजन सचिव पल्लवी मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।


