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कौशल्यागंगा में सिफा का 39वां वार्षिक उत्सव धूमधाम से आयोजित

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भुवनेश्वर, 2 अप्रैल:
कौशल्यागंगा स्थित केंद्रीय मीठे पानी की मत्स्य अनुसंधान संस्था (सिफा) के मुख्यालय में आज 39वां वार्षिक उत्सव बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। देश की प्रमुख मीठे पानी की मत्स्य पालन अनुसंधान संस्था के रूप में सिफा 1 अप्रैल 1987 से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अधीन कार्यरत है।

इस अवसर पर सेंट्रल यूनिवर्सिटी, तमिलनाडु के पूर्व कुलपति पद्मश्री प्रोफेसर ए. पी. दास मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने सिफा के 39वें स्थापना दिवस पर बधाई देते हुए संस्था के उल्लेखनीय योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि सिफा ने शोध, प्रकाशन और पेटेंट के क्षेत्र में प्रगति के साथ-साथ इन नवाचारों को समाज के जमीनी स्तर तक पहुंचाने में सफलता हासिल की है। साथ ही उन्होंने वंचित वर्गों के सशक्तिकरण, उद्यमिता प्रोत्साहन और लैंगिक समानता के प्रयासों की भी प्रशंसा की।

आईसीएआर के मत्स्य विज्ञान एवं कृषि शिक्षा विभाग के उपमहानिदेशक डॉ. जे. के. जेना ने कहा कि 2047 तक भारत को 34 मिलियन टन मछली उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त करना है, जिसमें से 25 मिलियन टन मीठे पानी के स्रोतों से आना आवश्यक है। उन्होंने कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे चुनौतियों को अवसर में बदलने की दिशा में कार्य करें।

ओकाक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार राउत ने कहा कि सिफा और ओकाक के संयुक्त प्रयासों से जलीय कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग कर त्वरित कृषि सलाह, रोगों की पूर्वानुमान और जल गुणवत्ता का आकलन संभव हो सकेगा।

कार्यक्रम की शुरुआत में सिफा के निदेशक डॉ. प्रमोद कुमार साहू ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्था की 39 वर्षों की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने उन्नत मछली प्रजातियों जैसे जयंती रोहू, अमृत कटला, सिफा GI-स्कैम्पी के विकास के साथ-साथ बायोफ्लॉक, RAS और एक्वापोनिक्स जैसी तकनीकों के माध्यम से जलवायु अनुकूल मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के प्रयासों का उल्लेख किया।

इस अवसर पर 8 प्रकाशनों और 2 प्रोटोटाइप का लोकार्पण किया गया। साथ ही वर्ष 2025 के लिए श्रीमती सुशीला मां, डॉ. गिरीश चंद्र चौधरी, डॉ. टी. रामप्रभु और डॉ. बी. आर. महांति स्मृति पुरस्कार भी प्रदान किए गए।

कार्यक्रम में भुवनेश्वर स्थित ICAR के विभिन्न संस्थानों, ओडिशा कृषि विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड के प्रतिनिधियों के साथ-साथ सिफा के सेवानिवृत्त कर्मचारी भी उपस्थित रहे। अंत में डॉ. जे. के. सुंदराय ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

Bharat News 9
Author: Bharat News 9

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