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मानव सेवा के पर्याय बने बद्री मिश्र : सेंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड में 50 वर्षों की गौरवशाली यात्रा

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मानव सेवा के पर्याय बने बद्री मिश्र : सेंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड में 50 वर्षों की गौरवशाली यात्रा

रक्तदान, प्राथमिक उपचार, पर्यावरण और अंतिम संस्कार सेवा के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान

पुरी, प्रतिनिधि।

समाज सेवा और मानवता की मिसाल बन चुके वरिष्ठ स्वयंसेवक बद्री मिश्र ने सेंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड के साथ अपनी सेवा के 50 वर्ष पूरे कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। पांच दशकों तक निरंतर जनसेवा, आपदा प्रबंधन, प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण, रक्तदान जागरूकता और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में उनके योगदान ने उन्हें ओडिशा के प्रमुख समाजसेवियों की श्रेणी में स्थापित किया है।

सेंट जॉन एम्बुलेंस की शुरुआत वर्ष 1877 में इंग्लैंड में हुई थी। युद्ध और आपातकालीन परिस्थितियों में घायल लोगों को तत्काल प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित यह संस्था वर्ष 1902 में भारत पहुंची और बाद में देशभर में अपनी सेवाओं का विस्तार किया। ओडिशा में इसकी स्थापना 1942 में हुई थी। इसी संगठन के साथ जुड़कर बद्री मिश्र ने मानव सेवा की अपनी लंबी यात्रा आरंभ की।

वर्ष 1976 में पुरी की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा के दौरान उत्कृष्ट सेवा कार्यों के लिए उन्हें सेंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड का दर्जा प्रदान किया गया था। तब से लेकर आज तक उन्होंने हजारों लोगों को प्राथमिक चिकित्सा और आपातकालीन सहायता का प्रशिक्षण देकर समाज में सेवा की भावना को मजबूत किया है।

वर्तमान में श्री मिश्र पुरी जिला मिशन ओडिशा एम्बुलेंस डिवीजन के सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं। हाल ही में सेंट जॉन एम्बुलेंस की राज्य शाखा के अवैतनिक सचिव निधि कुमार राउतराय, संयुक्त सचिव मधुसूदन मिश्र तथा डिवीजनल कमांडर अजय प्रधान ने पुरी जिले के प्रशिक्षित ब्रिगेड सदस्यों को केंद्रीय शाखा द्वारा जारी प्रमाणपत्र प्रदान किए।

163 बार रक्तदान कर रचा इतिहास

बद्री मिश्र का जीवन केवल प्रशिक्षण और संगठनात्मक कार्यों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अपने जीवन में 163 बार रक्तदान कर मानव सेवा का एक असाधारण उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनके प्रयासों से पुरी जिले में सैकड़ों युवा नियमित रक्तदाता के रूप में आगे आए हैं। रक्त की कमी से किसी मरीज की जान न जाए, इस उद्देश्य को लेकर उन्होंने वर्षों तक जागरूकता अभियान चलाया।

‘श्मशान साथी’ और ‘गाछा मणिष’ अभियान को मिली नई दिशा

कोरोना महामारी सहित विभिन्न कठिन परिस्थितियों में बद्री मिश्र ने अंतिम संस्कार सेवा से जुड़े स्वयंसेवकों को प्रेरित कर ‘श्मशान साथी’ जैसे मानवीय अभियानों को मजबूत किया। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण अभियान में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन में अनेक युवा ‘गाछा मणिष’ (वृक्ष मित्र) के रूप में समाज में पर्यावरण जागरूकता का संदेश दे रहे हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने किया सम्मानित

मानव सेवा के क्षेत्र में उनके दीर्घकालिक योगदान को देखते हुए हाल ही में ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री Mukesh Mahaling ने उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। यह सम्मान न केवल बद्री मिश्र के लिए, बल्कि उन हजारों स्वयंसेवकों के लिए भी प्रेरणा है जो निस्वार्थ भाव से समाज सेवा में जुटे हुए हैं।

नई पीढ़ी को तैयार करने का संकल्प

अपने 50 वर्षों के अनुभव को साझा करते हुए बद्री मिश्र ने कहा कि आने वाले समय में ब्रिगेड सदस्यों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि आपदा, दुर्घटना और आपातकालीन परिस्थितियों में अधिक प्रभावी ढंग से सेवा प्रदान की जा सके।

मानवता की सेवा का स्वर्णिम अध्याय

सेंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड में बद्री मिश्र की 50 वर्षों की यात्रा केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि मानवता, सेवा और समर्पण की ऐसी गाथा है जो नई पीढ़ी को समाज के प्रति अपने दायित्वों का एहसास कराती है। रक्तदान से लेकर जीवनरक्षा प्रशिक्षण और पर्यावरण संरक्षण तक, उनका योगदान यह साबित करता है कि एक व्यक्ति का संकल्प समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।

Bharat News 9
Author: Bharat News 9

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